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Showing posts with the label हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल

छीत स्वामी

                🙏🎯  छीत स्वामी  🎯🙏 🙏🎯 किस अष्टछाप के कवि का सम्बन्ध "पूछरी (उछनी) का लौटा" नामक स्थान से है? अ- सुन्दरदास  ब- चतुर्भुज दास  स- छीतु चौबे  द- विट्ठलनाथ  उत्तर:- ???? 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 👉 छीत स्वामी का जन्म- 1515 ईं• में मथुरा में हुआ । 👉 ये मथुरा के सुसम्पन्न पण्डित (पण्डा) और बीरबल के तीर्थ पुरोहित थे यानि यह अकबर के दरबारी कवि  व बीरबल के पुरोहित थे। 👉 इन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण गोवर्धन के निकट "उछनी (पूछरी) का लौटा" नामक स्थान पर बिताया था (यानी गोस्वामी विट्ठलनाथ से दीक्षा लेने के बाद) 👉 छीत स्वामी के गुरु का नाम- विट्ठलनाथ था। 👉छीत स्वामी अपने गुरु से अत्याधिक प्रेम थे। 👉 गुरु विट्ठलनाथ की मृत्यु का समाचार सुनते ही इन्होंने अपने प्राण त्याग दिए । 👍👉 अमीर खुसरो ने भी अपने गुरु हजरत निजामुद्दीन औलिया की मृत्यु का समाचार सुनते ही, दुसरे दिन प्राण त्याग दिए थे ।   👉 छीत स्वामी अत्यंत उदण्डी प्रवृत्ति के थे इसलिए इन्हें मथुरा म...

संत रज्जब दास

              🙏🎯संत रज्जब दास🎯🙏 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 👉 जन्म:- 1567 ईं में जयपुर के निकट सांगानेर में हुआ । 👉 यह दादूदयाल के प्रधान शिष्यों में से एक थे। 👉 रज्जब दास का वास्तविक नाम:- "रज्जब अली खाँ" था । 👉 'अंगबंधु' रज्जब दास की प्रमुख रचना है जिसमें दादूदयाल के पद संकलित हैं । 👉 'सर्वांगी' (सब्बंगी)  व 'बैनी' भी इनकी महत्त्वपूर्ण रचनाएं हैं । 👉 रज्जब ने 'सब्बंगी ' में स्वरचित पदों के अतिरिक्त अन्य निर्गुण संतों द्वारा रचित पदों को भी स्थान दिया । 👉 रज्जब के-- /  स्वयं के पद "रज्जबबानी" में संकलित है। 👉रज्जब ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए- "दृष्टांत शैली " का सहारा लिया । 👉 "सुन्दर दास की अपेक्षा रज्जब दास में कवित्व शक्ति अधिक थी।"- डाॅ• बच्चन सिंह के अनुसार  🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏                    🙏🎯 धन्यवाद !!🎯🙏

भक्तिकालीन गद्य साहित्य

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 👍👉भ्रमरगीत परम्परा का प्रारंभ सूरदास से मााना जाता है । 👍👉 भ्रमरगीत परम्परा का उपजीव्य ग्रंथ भागवत् पुराण है जिसके दशम स्कंद के 46 - 47 वें अध्याय से यह   प्रसंग लिया गया है। 1- सूरदास      भ्रमरगीत        भावुक गोपियां  2- नंददास       भँवरगीत      वाक्पटु/तर्कशील/ चतुर                                          गोपियां  3- सत्यनारायण कविरत्न                           भ्रमरदूत      माता यशोदा को भारत                                          के रूप में चित्रित किया                       ...